- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
उज्जैन का भावुक नज़ारा: दिव्यांग बच्चों ने गरबे की ताल पर बिखेरी खुशियां, महापौर भी बने हमसफ़र; रंग-बिरंगे परिधानों और मुस्कान से जीता हर किसी का दिल!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन से नवरात्रि के पावन अवसर पर एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक दृश्य सामने आया। शहर के दिव्यांग पार्क में आयोजित विशेष गरबा महोत्सव में दिव्यांग बच्चों ने अपनी मुस्कान और उत्साह से हर किसी का मन मोह लिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे ये बच्चे जब गरबे की धुन पर थिरकते दिखे तो पूरा माहौल तालियों और खुशी से गूंज उठा।
इस खास आयोजन की शुरुआत महापौर मुकेश टटवाल ने की। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए खुद भी उनके साथ गरबा खेला। महापौर ने कहा कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास और छुपी प्रतिभा को सामने लाने का एक प्रयास है। उन्होंने समाज से अपील की कि ऐसे आयोजनों में ज्यादा से ज्यादा लोग शामिल होकर इन बच्चों को प्रोत्साहित करें।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पारंपरिक गीतों और धुनों पर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। दर्शकों के बीच बैठे लोग बच्चों के हर कदम पर तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे। बच्चों के उत्साह और जज़्बे को देखकर कई दर्शक भावुक हो गए।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि खुशियों और उत्सव का कोई बंधन नहीं होता। दिव्यांग बच्चे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनके भीतर भी अपार प्रतिभा और जुनून छिपा है। गरबा पंडाल में उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि अगर मन में हौसला हो तो कोई चुनौती बड़ी नहीं होती।
नवरात्रि के इस अवसर पर उज्जैन का यह दृश्य लोगों के दिलों में लंबे समय तक यादगार रहेगा। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के लिए आत्मविश्वास का मंच बना, बल्कि समाज को भी यह सिखा गया कि हर खुशी तब और खास हो जाती है जब उसमें सबकी भागीदारी हो।